धरमजयगढ़, छाल और लैलूंगा रेंज में हाथियों का उत्पात, अलग-अलग गांवों में फसल को नुकसान
रायगढ़। जिले में हाथियों की बढ़ती सक्रियता किसानों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। जंगल से निकलकर हाथियों के दल रात के समय खेतों में पहुंच रहे हैं और तैयार हो रही धान की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। रविवार रात धरमजयगढ़ वन मंडल के अलग-अलग गांवों में हाथियों ने 10 किसानों के खेतों में फसल रौंद दी। घटना के बाद प्रभावित किसानों को नुकसान की भरपाई की चिंता सताने लगी है। वहीं, वन विभाग ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है।
जानकारी के अनुसार धरमजयगढ़ वन परिक्षेत्र के चैनपुर में 36 हाथियों का दल विचरण कर रहा है। इसी दौरान एक हाथी जंगल से निकलकर तारा राठिया के खेत में पहुंच गया और धान की फसल को नुकसान पहुंचाया। दूसरी ओर, बायसी गांव में 20 हाथियों के दल ने जगरनाथ राठिया और मंगतू राठिया के खेतों में फसल रौंद दी। इसी तरह छाल वन परिक्षेत्र के सिथरा और तेंदूमुड़ी में हाथियों ने बिहारी, मनीराम, रामकुमार और कन्हैया के खेतों को नुकसान पहुंचाया। लैलूंगा वन परिक्षेत्र के कोड़ामाई में भी हाथियों का दल धोबसिंह, परदेशी और अर्जुन के खेतों तक पहुंच गया और धान की फसल बर्बाद कर दी।
हाथियों को खदेड़ने में जुटे ग्रामीण
खेतों में हाथियों के पहुंचने की सूचना मिलते ही हाथी मित्र दल और ग्रामीण उन्हें जंगल की ओर खदेड़ने के प्रयास में जुट गए। हालांकि, हाथी देर रात तक खेतों में मौजूद रहे। उनके जंगल लौटने के बाद वन विभाग की टीम ने प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर फसल को हुए नुकसान का आकलन शुरू किया। विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।
जिले में 134 हाथियों की मौजूदगी
वन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, रायगढ़ जिले के दो वन मंडलों में कुल 134 हाथी विचरण कर रहे हैं। इनमें धरमजयगढ़ वन मंडल में 126 हाथी शामिल हैं, जिनमें 41 नर, 60 मादा और 25 शावक हैं। वहीं, रायगढ़ वन मंडल में 8 हाथियों का दल मौजूद है। इसमें 2 नर, 2 मादा और 4 शावक शामिल हैं। हाथियों की लगातार मौजूदगी और खेतों तक उनकी पहुंच से ग्रामीण क्षेत्रों में फसल सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अब प्रभावित किसानों की नजर वन विभाग के सर्वे और मुआवजा प्रक्रिया पर टिकी है।
